Sunday, April 21, 2019

राजनीति २०१९



कुछ नहीं बदला,
अब तक इन सालों में,
जहाँ चली थी राजनीति,
अभी भी है उन्हीं हालों में।

था कुछ यूँही वक्त कटा
फिर मन्दिर तक है बवालों में,
अभी तो था पूजा नारी को,
अभी फिर है सवालों में। 

सरकारें देती कुछ वादे
जनता जीती उन्हें ख्यालों में,
मतदान तक जो देव होते
रह जाते फिर मलालों में।

२०१९ का जाम महकता
फिर वादों के उन प्यालों में,
नेता दिखता फिर एक रोज
फिर खड़ा उन हालों में।

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