Saturday, July 28, 2018

मेरी खामोशी का जवाब हो तुम......

दिनभर जो भागा, रातों को भी जागा,
दिन से होकर रातों को जो जाता,
इस दिल से धड़कन को जगाता,
वो बेहतरिन ख़्वाब हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
आखिर मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

तेरी खुशी में शामिल,तुझसे ही कामिल,
तुझसे होकर मुझ तक जो आता
इस दिल के सुरों को जगाता,
वो सुरीला राग हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
क्योंकि मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

तेरी बातों का हिस्सा,मेरी यादों का किस्सा,
तुझसे होकर मुझको जो भाता
इस दिल के किस्सों को बताता,
वो नयी किताब हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
क्योंकि मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

Friday, July 13, 2018

शहर

कितने बेतरतीब तरीके से बदल देता है,
ये शहर!
कुछ को सफल तो कुछ को मचल देता है,
ये शहर!


फुरसत से बैठे,यूँही फिर कुछ काम किया
गाँव में सभी ने शुरू से यूँही अपना नाम किया
फिर कुछ लोगों की सोच बढ़ी,
फिर कुछ लोगों के ख़्वाब बढ़े,
शायद गाँव की बेरंग सी दुनिया में,
कुछ ख्वाबों का ख्वाब है शहर।


दो वक्त की रोटी भी कभी एक पहर में बना ली
बिन पटाखे,दीपों से ही दीवाली मना ली
फिर कुछ लोगों के काम बढ़े,
फिर कुछ चीजों के दाम बढ़े,
शायद महंगाई भरी इस दुनिया में,
कुछ आहतों में राहत है शहर।


"शायद".....हाँ शहर पे ये एक व्यंग्य है,
शहरों में जैसे जीवन भंग है,
दर-दर भटकता रंक है।
हर बात में नया कोई ढंग है,
पर गाँव में ही अपने जीवन का रंग है।

Friday, July 06, 2018

है प्यार क्या ?

है ख्वाब कोई एहसास कोई
एहसास कोई है पास कोई
उस एहसास को कोई नाम तो दो
पास ही क्यों? साथ भी हो,फरमान तो दो
है प्यार क्या ?
बस एक ख्वाब यूँ बदनाम ना हो।

है ख्वाब कोई गीत कोई
गीत कोई है संगीत कोई
उस गीत में कोई साज तो दो
हो नाज इसपे, ऐसी आवाज तो दो
है प्यार क्या?
बस एक ख्वाब को यूँ ताज ना दो।

ख्वाब को अब ख्वाब ही रहने दो
जो ख्वाहिश हो फिर चाहे,उन्हें कहने दो
ख्वाब पूरा हो कभी,किसे पता
बस इंतेज़ार में अब,जो भी हो सहने दो।