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Sunday, May 08, 2022


वो क्या है जो तुम्हें माँ बनाता है ?
एक नन्हा बच्चा 
क्यों सबसे पहले बस माँ बुलाता है ?

मुश्किल हो फिर चाहे कितनी
क्यों माँ का सर सहलाना ही सुलाता है?

चोट लगे, दर्द पूरे बदन में उठे
क्यों माँ पुकारना हर दर्द भुलाता है?

सहना सिखाती, हंसाती हो तुम, 
चाहे जग कितना रुलाता है।
भगवान की बनाई भगवान हो तुम
यूंही नहीं तुम्हें ये संसार माँ बुलाता है।

भूल जाएं दुनिया सारी भूल जाएं जहान
माँ को नहीं यूंही कोई भुलाता है।
मुश्किलों का हल, साथ हो तुम हर पल
यूंही नहीं भानु तुम्हें माँ बुलाता है।

Tuesday, May 11, 2021

सीख जाते हैं


लबालब सैलाबों से भरी आंखें 

जब

बांध तोड़ आजाद कर देना चाहती हैं

उन

मोतियों को जो तुमने भावनाओं में पिरोए थे।


एक भार दिल से होकर पहुंच जाता है

कहीं

आंखों के उस किनारे तक

जहां

साथ खेलते बच्चों की हंसी

या 

दूर डूबते सूरज का सुकून भी

वो

उस भार को हल्का नहीं कर सकता।


ऐसे किसी रोज सीख जाते हो तुम

कि

जरूरी है उस बांध का टूट जाना

कि

जरूरी है ठहरे आंसुओं का छूट जाना

कि

जरूरी है जिंदगी का उत्साह से जिया जाना।


Wednesday, October 31, 2018

किस्सा-ए-कहानी

बस बहुत हुआ,
कहानी के किस्सो में अब न यूँ शुमार होंगे।
फिर चाहे,
किसी के दिल के हिस्सों में बार-बार होंगे।

किसी कहानी से निकलकर किस्सा बने 
तो क्या होता है?
सूरज उगे कहीं क्षितिज पर,
भोर न इस किस्से का होता है।

कभी जो किस्सा छूट गया तो,
वक्त कहानी का भी रोता है।
कुछ दिन की वो बात सयानी,
किस्सा कहीं फिर खोता है।

किस्सा बस एक साथ निराला,
कहानी की याद में ही सोता है।
होता कुछ न नया रात भर,

नई सुबह,सब पुराना होता है।

किस्सा ख़ुद जो दूर गया तो,
कहानी का वो छोर नया होता है।
पर साथ न दे पाऊंगी,
कहानी का ये दर्द बयां होता है।

किस्सा कहानी से कब दूर गया,
वो तो हमेशा उसका हिस्सा होता है।
कहानी बढ़े तो आए समझ,
कि आखिर किस्सा तो किस्सा होता है।

Friday, July 13, 2018

शहर

कितने बेतरतीब तरीके से बदल देता है,
ये शहर!
कुछ को सफल तो कुछ को मचल देता है,
ये शहर!


फुरसत से बैठे,यूँही फिर कुछ काम किया
गाँव में सभी ने शुरू से यूँही अपना नाम किया
फिर कुछ लोगों की सोच बढ़ी,
फिर कुछ लोगों के ख़्वाब बढ़े,
शायद गाँव की बेरंग सी दुनिया में,
कुछ ख्वाबों का ख्वाब है शहर।


दो वक्त की रोटी भी कभी एक पहर में बना ली
बिन पटाखे,दीपों से ही दीवाली मना ली
फिर कुछ लोगों के काम बढ़े,
फिर कुछ चीजों के दाम बढ़े,
शायद महंगाई भरी इस दुनिया में,
कुछ आहतों में राहत है शहर।


"शायद".....हाँ शहर पे ये एक व्यंग्य है,
शहरों में जैसे जीवन भंग है,
दर-दर भटकता रंक है।
हर बात में नया कोई ढंग है,
पर गाँव में ही अपने जीवन का रंग है।

Sunday, May 27, 2018

हार

खुद को हार जाओ,इससे बड़ी क्या हार होगी?
पर मैं तो खुद में ही हार रहा था।
जैसे जिंदा हूँ हर पल
और हर पल ही मुझे मार रहा था।

दास्ताने सुनी हैं हमने भी कई,
पर दास्तानों में भी तो कहीं कोई हम सा नहीं मिल रहा था।
यहाँ हर रोज मुसीबतों से मुसीबतों में उलझा एक पहलू मिल रहा था।

कहानियों को भी एक हिस्से में कुछ राहत तो नसीब होती है।
यहाँ तो बस साँसें चल रही थी, न जाने कहाँ मिले, जहाँ जिन्दगी भी साँसों के करीब होती है।

क्या सिर्फ कहानियों में जीना,सिर्फ इतना भर थी साँस?
कुछ कहानियाँ तो हम भी लिखें,खत्म थी वो भी आस।

साँसें जुदा हो जाए,इतनी ख्वाइश से पहले की कुछ ख्वाइश बाकी है।
लोग जाते हैं मयखाने,और मेरा दर्द ही मेरा साकी है।

Saturday, April 14, 2018

नन्हे बीज

कभी नन्हे थे वो बीज,
आज उनपे फसल का जोर है।
कभी मूक थे वो बीज,
आज उनपे जमाने का शोर है।
हवाओं की बयार इस गली,उस गली,
हवाओं का रुख न जाने किस ओर है?

कभी नन्हे थे वो बीज,
आज उनपे फसल का जोर है।

कभी एक एक कर लगाया था उन्हें,
आज उनपे मिट्टी का जोर है।
कभी शान्त भाव से जगाया था जिन्हें
आज उनपे बंधी ना कोई डोर है।
हरियाली की झलक इस गली,उस गली
हरियाली की चमक हर ओर है।

कभी नन्हे थे वो बीज,
आज उनपे फसल का जोर है।

Sunday, April 01, 2018

वाह ! री किस्मत तेरे फैसले

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
कल का राही रात बैचैन, 
और दुनियाभर से लड़ जाता है।
सुबह की अजान से पहले उठने का फैसला,
कमजोर एक रात में पड़ जाता है।

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
एक सोच में अडिग,सुबह से पहले
कदम डिगा जाता है।
रात्रि भोर बस पहर बीताने,
यादों में नैन भीगा जाता है।

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
लाख मंजूर मुझे,
पर तुझसे क्या जीत पाऊँगा?
रातों को जो सोचा,
तुझसे हार कर भी जी जाऊँगा?

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
इनसे लड़ जाऊँ,
मुझ में इतनी ताकत नहीं।
कुछ तो रहम कर,
मुझे अपने ही गम से राहत नहीं।

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
राहत भी क्या तुझसे,
मुझे मंजूर होगी?
गम से मैं खुद लड़ जाऊँ,
तेरी ये रज़ा भी तो बेकसूर होगी।

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
चल इनसे जीतने की 
क्या आजमाइश करूँ।
बस साथ दे तो हर मुश्किल में,
इतनी सी ख्वाइश करूँ।