Showing posts with label India. Show all posts
Showing posts with label India. Show all posts

Sunday, May 08, 2022


वो क्या है जो तुम्हें माँ बनाता है ?
एक नन्हा बच्चा 
क्यों सबसे पहले बस माँ बुलाता है ?

मुश्किल हो फिर चाहे कितनी
क्यों माँ का सर सहलाना ही सुलाता है?

चोट लगे, दर्द पूरे बदन में उठे
क्यों माँ पुकारना हर दर्द भुलाता है?

सहना सिखाती, हंसाती हो तुम, 
चाहे जग कितना रुलाता है।
भगवान की बनाई भगवान हो तुम
यूंही नहीं तुम्हें ये संसार माँ बुलाता है।

भूल जाएं दुनिया सारी भूल जाएं जहान
माँ को नहीं यूंही कोई भुलाता है।
मुश्किलों का हल, साथ हो तुम हर पल
यूंही नहीं भानु तुम्हें माँ बुलाता है।

Tuesday, May 11, 2021

सीख जाते हैं


लबालब सैलाबों से भरी आंखें 

जब

बांध तोड़ आजाद कर देना चाहती हैं

उन

मोतियों को जो तुमने भावनाओं में पिरोए थे।


एक भार दिल से होकर पहुंच जाता है

कहीं

आंखों के उस किनारे तक

जहां

साथ खेलते बच्चों की हंसी

या 

दूर डूबते सूरज का सुकून भी

वो

उस भार को हल्का नहीं कर सकता।


ऐसे किसी रोज सीख जाते हो तुम

कि

जरूरी है उस बांध का टूट जाना

कि

जरूरी है ठहरे आंसुओं का छूट जाना

कि

जरूरी है जिंदगी का उत्साह से जिया जाना।


Monday, February 01, 2021

जय जवान जय किसान?

 


अपनी मांग रख रहे थे 

या

हिंसा कर कई मांग उजाड़ रहे थे 


किसान तो नहीं हो सकते साहब

क्या कहोगे उनको

जो लाल किले की प्राचीर से तिरंगा उखाड़ रहे थे!


बात ट्रैक्टर मार्च की हुई थी

या

उसकी जो ये हिंसा का प्रचार कर रहे थे


किसान तो नहीं हो सकते साहब

क्या कहोगे उनको

जो देश के दिल की हालत बिगाड़ रहे थे!


बात बेशक कृषि कानूनों की थी

पर ये क्या जो ये पूरा दिन कर रहे थे

किसान तो बस कंधा हैं शायद

क्या दूजी कोई साजिश मुमकिन कर रहे थे!





( शायद मैं ग़लत हूं अपनी राय को लेकर, शायद मैं ग़लत हूं इन हवाओं को लेकर जो कल दिन से हर जगह महसूस हो रही है, शायद मैं ग़लत हूं किसानों पर कही गई मेरी किसी भी राय को लेकर........

लेकिन मैं ग़लत नहीं जो कल लाल किले और देश की राजधानी में हुआ उस पर अपने विचार रख कर। कल जो हुआ उसे ग़लत कहने में कोई 'शायद' नहीं है।


जिस तरह किसानों का मकसद सिर्फ एक शांतिप्रिय मार्च निकालना था उसी तरह मेरा मकसद भी सिर्फ शांतिप्रिय तरीके से अपने विचार रखना है। किसी भी तरह से किसी के विचारों को आहत करना मेरा मकसद नहीं। )