Showing posts with label Love. Show all posts
Showing posts with label Love. Show all posts

Sunday, May 08, 2022


वो क्या है जो तुम्हें माँ बनाता है ?
एक नन्हा बच्चा 
क्यों सबसे पहले बस माँ बुलाता है ?

मुश्किल हो फिर चाहे कितनी
क्यों माँ का सर सहलाना ही सुलाता है?

चोट लगे, दर्द पूरे बदन में उठे
क्यों माँ पुकारना हर दर्द भुलाता है?

सहना सिखाती, हंसाती हो तुम, 
चाहे जग कितना रुलाता है।
भगवान की बनाई भगवान हो तुम
यूंही नहीं तुम्हें ये संसार माँ बुलाता है।

भूल जाएं दुनिया सारी भूल जाएं जहान
माँ को नहीं यूंही कोई भुलाता है।
मुश्किलों का हल, साथ हो तुम हर पल
यूंही नहीं भानु तुम्हें माँ बुलाता है।

Sunday, December 16, 2018

कोशिश है मेरी.......


कोशिश है मेरी.......



कोशिश है मेरी,तुमसे,तुमसा इश्क करूँ
मरते हो जैसे तुम मुझपे वैसा ही मैं तुमपे मरूँ।

ये जहाँ भर की कसमें,
ये दुनियाभर की रस्में,
इनसे फिजूल ही मैं क्यों डरूँ?
कोशिश है मेरी,तुमसे,तुमसा ही इश्क़ करूँ।

तुमको पाने की ख़्वाहिशें,
फिर तुमपे लूट जाने की नवाजिशें,
ये दरख्वास्त भी मैं क्यों भरूँ ?
कोशिश है मेरी,तुमसे,तुमसा ही इश्क़ करूँ।

लूट जाऊँ तुमपे,
मर जाऊँ तुमपे,
इस जहाँ से फिर मैं क्या डरूँ ?
कोशिश है मेरी,तुमसे,तुमसा ही इश्क़ करूँ।

तुम्हें चाहूँ तो जी जाऊँ,
तुम्हें जी लूँ फिर मार जाऊँ,
सांसों में हवाएँ मैं बस तब तक भरूँ।
कोशिश है मेरी,तुमसे,तुमसा ही इश्क़ करूँ।

कोशिश है मेरी,तुमसे,तुमसा ही इश्क़ करूँ।
मरते हो जैसे तुम मुझपे वैसा ही मैं तुमपे मरूँ।

Tuesday, November 20, 2018

एक वादा....

ये जो लम्हें होंगें ना,
दरमियाँ अपने.....
इन्हें बड़ी पाक नियत से निभाना है।
ये जो रिश्ता होगा ना,
दरमियाँ अपने......
इसे बड़ी जिम्मेदारी से सजाना है।

आएँगे कई लम्हें मुसीबत के,
उन्हें साथ-साथ ही हराना है।
जो आएँ पल खुशियों के,
उन्हें साथ-साथ ही बढ़ाना है।

ज़िन्दगी की भागदौड़ में,
ढूंढना फुरसत का बहाना है।
जो न दे सके वक्त भी एक-दूसरे को,
तो वक्त से लम्हों को चुराना है।

ये जो रिश्ता होगा ना,
दरमियाँ अपने......
इसे हर कसौटी से जीताना है।
ये जो लम्हें होंगे ना,
दरमियाँ अपने......
इन्हें बड़ी खूबसूरती से बीताना है।

Friday, August 10, 2018

वो एक ख्वाब है आता......

बारिश की पहली फुहारों सा,
इश्क के नए खुमारों सा,
सुबह के पहले ख्याल को लाता,
शब के आख़िरी तमस तक जाता,
आँख लगते ही
वो एक ख्वाब है आता

सदियों के मेरे जिक्र सा,
हर मौसम एक फिक्र सा,
जीने का जो एक सलीका लाता,
जिंदगी में फिर रस भर आता,
आँख लगते ही
वो एक ख्वाब है आता


वसंत की हरियाली सा,
मैदानों में फैली खुशहाली सा,
हर दिल में घर कर जाता,
जीने में फिर पर लाता,
आँख लगते ही
वो एक ख्वाब है आता


पल हर पल कुछ अपना सा,
तेरी आँख का इक सपना सा,
हर दम मुझको भा जाता,
तुझ तक मुझको जो लाता,
आँख लगते ही
वो एक ख्वाब है आता


सर्दी की लंबी रातों सा,
कभी न मिटती यादों सा,
यादों का एक संसार सजाता,
तुझसे मेरा प्रेम बताता,
आँख लगते ही
वो एक ख्वाब है आता

Saturday, July 28, 2018

मेरी खामोशी का जवाब हो तुम......

दिनभर जो भागा, रातों को भी जागा,
दिन से होकर रातों को जो जाता,
इस दिल से धड़कन को जगाता,
वो बेहतरिन ख़्वाब हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
आखिर मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

तेरी खुशी में शामिल,तुझसे ही कामिल,
तुझसे होकर मुझ तक जो आता
इस दिल के सुरों को जगाता,
वो सुरीला राग हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
क्योंकि मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

तेरी बातों का हिस्सा,मेरी यादों का किस्सा,
तुझसे होकर मुझको जो भाता
इस दिल के किस्सों को बताता,
वो नयी किताब हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
क्योंकि मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

Friday, July 06, 2018

है प्यार क्या ?

है ख्वाब कोई एहसास कोई
एहसास कोई है पास कोई
उस एहसास को कोई नाम तो दो
पास ही क्यों? साथ भी हो,फरमान तो दो
है प्यार क्या ?
बस एक ख्वाब यूँ बदनाम ना हो।

है ख्वाब कोई गीत कोई
गीत कोई है संगीत कोई
उस गीत में कोई साज तो दो
हो नाज इसपे, ऐसी आवाज तो दो
है प्यार क्या?
बस एक ख्वाब को यूँ ताज ना दो।

ख्वाब को अब ख्वाब ही रहने दो
जो ख्वाहिश हो फिर चाहे,उन्हें कहने दो
ख्वाब पूरा हो कभी,किसे पता
बस इंतेज़ार में अब,जो भी हो सहने दो।

Thursday, June 14, 2018

किसी रोज

कभी मोहब्बत का भी इज़हार किया कर
कि कहीं मोहब्बत बस दिल दिल में ना रह जाए।
यूँ तो कहते हो कई किस्से कई दुनिया के
कि कहीं किस्सा-ए-मोहब्बत बस महफ़िल में ना रह जाए।

वरना,
फिर किसी रोज
जन्नत से देखेंगे तुझे।
होता था जिस दिल से इस "दिल' का जिक्र
फिर किसी रोज जन्नत से देखेंगे उसे।

Tuesday, May 08, 2018

नटखट हँसी

चलो आओ आज कुछ तुम्हें सोचकर लिखता हूँ,
तुमने मुझे बहुत देखा इन निगाहों से
अब देखूँ मैं भी,तुम्हारी निगाहों से कैसा दिखता हूँ।

कितनी "नटखट" थी वो हँसी तुम्हारी,
साथ में मेरे,वो जिंदगी हमारी......

खुद को तुम्हारी निगाहों में तलाशा,
तो फिर वो "नटखट" हँसी मिल गयी।
हो कितनी लंबी उदासी,
याद करने से वो "नटखट" हँसी मेरी हंसी फिर खिल गयी।

उस "नटखट" हँसी में भी कितने रंग थे,
साथ हमारे होने के रास्ते भी तो तंग थे।
वो हँसी खुद ही "नटखट" लगने लगी
कई परेशानियों के इतर,जो हम संग थे।

क्या वो "नटखट" हँसी हमारे साथ से थी?
या फिर हमारी बीती याद से थी?
जो भी थी वजह उस "नटखट" हँसी की,
हमारी बातें तो तुम्हारे हँसने की बात से थी।

Sunday, April 22, 2018

अब बस यूँही

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ,
जैसे,तू इम्तिहान हो मेरा
और हर सवाल में जिक्र हो तेरा....

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ,
जैसे,तू इत्मीनान हो मेरा
और हर हाल में जिक्र हो तेरा......

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ,
जैसे,तू भगवान हो मेरा
और हर काल में जिक्र हो तेरा......

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ,
जैसे,तू सब कुछ हो मेरा
और हर चाल में हर ढाल में,
शांत या बवाल में
बस जिक्र हो तेरा।

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ।

Sunday, March 25, 2018

साथ तुम्हारा

कोशिशें कामयाबी से जा मिली तो कुछ हाथ तुम्हारा भी था।

खामोशियाँ शोर से जा मिली तो कुछ हाथ तुम्हारा भी था।

दर्द मरहम से जा मिला तो कुछ हाथ तुम्हारा भी था।

"कहानियां" "किस्सो" से जा मिली तो कुछ हाथ तुम्हारा भी था।

परेशानियाँ खुशियों से जा मिली तो कुछ हाथ तुम्हारा भी था।

उलझने सुलझने लगी तो कुछ हाथ तुम्हारा भी था।

मुसिबतें हल पाने लगी तो कुछ हाथ तुम्हारा भी था।

तनहाइयाँ किसी अपने से आ मिली तो वो साथ तुम्हारा ही था।


हाँ काबिल बेशक रहा हूँगा मैं, पर काबिलियत समझा पाया,
वो साथ तुम्हारा ही था।

🖋 भानु_प्रकाश