वो क्या है जो तुम्हें माँ बनाता है ?
एक नन्हा बच्चा
क्यों सबसे पहले बस माँ बुलाता है ?
मुश्किल हो फिर चाहे कितनी
क्यों माँ का सर सहलाना ही सुलाता है?
चोट लगे, दर्द पूरे बदन में उठे
क्यों माँ पुकारना हर दर्द भुलाता है?
सहना सिखाती, हंसाती हो तुम,
चाहे जग कितना रुलाता है।
भगवान की बनाई भगवान हो तुम
यूंही नहीं तुम्हें ये संसार माँ बुलाता है।
भूल जाएं दुनिया सारी भूल जाएं जहान
माँ को नहीं यूंही कोई भुलाता है।
मुश्किलों का हल, साथ हो तुम हर पल
यूंही नहीं भानु तुम्हें माँ बुलाता है।

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