Saturday, July 28, 2018

मेरी खामोशी का जवाब हो तुम......

दिनभर जो भागा, रातों को भी जागा,
दिन से होकर रातों को जो जाता,
इस दिल से धड़कन को जगाता,
वो बेहतरिन ख़्वाब हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
आखिर मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

तेरी खुशी में शामिल,तुझसे ही कामिल,
तुझसे होकर मुझ तक जो आता
इस दिल के सुरों को जगाता,
वो सुरीला राग हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
क्योंकि मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

तेरी बातों का हिस्सा,मेरी यादों का किस्सा,
तुझसे होकर मुझको जो भाता
इस दिल के किस्सों को बताता,
वो नयी किताब हो तुम।
चुप हो जाता हूँ अक्सर मैं यूँही
क्योंकि मेरी खामोशी का जवाब हो तुम।

2 comments: