Sunday, April 22, 2018

अब बस यूँही

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ,
जैसे,तू इम्तिहान हो मेरा
और हर सवाल में जिक्र हो तेरा....

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ,
जैसे,तू इत्मीनान हो मेरा
और हर हाल में जिक्र हो तेरा......

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ,
जैसे,तू भगवान हो मेरा
और हर काल में जिक्र हो तेरा......

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ,
जैसे,तू सब कुछ हो मेरा
और हर चाल में हर ढाल में,
शांत या बवाल में
बस जिक्र हो तेरा।

अब बस यूँही
तुझे याद करने लगता हूँ।

Saturday, April 14, 2018

नन्हे बीज

कभी नन्हे थे वो बीज,
आज उनपे फसल का जोर है।
कभी मूक थे वो बीज,
आज उनपे जमाने का शोर है।
हवाओं की बयार इस गली,उस गली,
हवाओं का रुख न जाने किस ओर है?

कभी नन्हे थे वो बीज,
आज उनपे फसल का जोर है।

कभी एक एक कर लगाया था उन्हें,
आज उनपे मिट्टी का जोर है।
कभी शान्त भाव से जगाया था जिन्हें
आज उनपे बंधी ना कोई डोर है।
हरियाली की झलक इस गली,उस गली
हरियाली की चमक हर ओर है।

कभी नन्हे थे वो बीज,
आज उनपे फसल का जोर है।

Sunday, April 08, 2018

झटका शायद कुछ जोर का था

बहुत झटके लगे इस दिल को,
पर न जाने कैसे,बस संभलता रहा।
शाम सा था लोगों का भी साथ,
पर न जाने कैसे,मिलने को बस ढलता रहा।

आज,
झटका शायद कुछ जोर का है,

बहुत आश लगाए बैठा था किसी से,
और वक्त भी ये आगे चलता रहा।
अचानक एक "ना" उसकी,
पर न जाने क्यों,आंखें मैं बस मलता रहा।

आज,
झटका शायद कुछ जोर का है,

ना अश्क रुके ना बातें,
पर न जाने कैसे,ख्यालों में ही टहलता रहा।
अभी नहीं, "ना" सही सोच तो रहा था,
पर न जाने क्यों,ये दिल इस बार बस मचलता रहा।

आज,
झटका शायद कुछ जोर का था।

Sunday, April 01, 2018

वाह ! री किस्मत तेरे फैसले

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
कल का राही रात बैचैन, 
और दुनियाभर से लड़ जाता है।
सुबह की अजान से पहले उठने का फैसला,
कमजोर एक रात में पड़ जाता है।

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
एक सोच में अडिग,सुबह से पहले
कदम डिगा जाता है।
रात्रि भोर बस पहर बीताने,
यादों में नैन भीगा जाता है।

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
लाख मंजूर मुझे,
पर तुझसे क्या जीत पाऊँगा?
रातों को जो सोचा,
तुझसे हार कर भी जी जाऊँगा?

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
इनसे लड़ जाऊँ,
मुझ में इतनी ताकत नहीं।
कुछ तो रहम कर,
मुझे अपने ही गम से राहत नहीं।

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
राहत भी क्या तुझसे,
मुझे मंजूर होगी?
गम से मैं खुद लड़ जाऊँ,
तेरी ये रज़ा भी तो बेकसूर होगी।

वाह री किस्मत तेरे फैसले,
चल इनसे जीतने की 
क्या आजमाइश करूँ।
बस साथ दे तो हर मुश्किल में,
इतनी सी ख्वाइश करूँ।