Tuesday, May 08, 2018

नटखट हँसी

चलो आओ आज कुछ तुम्हें सोचकर लिखता हूँ,
तुमने मुझे बहुत देखा इन निगाहों से
अब देखूँ मैं भी,तुम्हारी निगाहों से कैसा दिखता हूँ।

कितनी "नटखट" थी वो हँसी तुम्हारी,
साथ में मेरे,वो जिंदगी हमारी......

खुद को तुम्हारी निगाहों में तलाशा,
तो फिर वो "नटखट" हँसी मिल गयी।
हो कितनी लंबी उदासी,
याद करने से वो "नटखट" हँसी मेरी हंसी फिर खिल गयी।

उस "नटखट" हँसी में भी कितने रंग थे,
साथ हमारे होने के रास्ते भी तो तंग थे।
वो हँसी खुद ही "नटखट" लगने लगी
कई परेशानियों के इतर,जो हम संग थे।

क्या वो "नटखट" हँसी हमारे साथ से थी?
या फिर हमारी बीती याद से थी?
जो भी थी वजह उस "नटखट" हँसी की,
हमारी बातें तो तुम्हारे हँसने की बात से थी।