वाह री किस्मत तेरे फैसले,
कल का राही रात बैचैन,
और दुनियाभर से लड़ जाता है।
सुबह की अजान से पहले उठने का फैसला,
कमजोर एक रात में पड़ जाता है।
वाह री किस्मत तेरे फैसले,
एक सोच में अडिग,सुबह से पहले
कदम डिगा जाता है।
रात्रि भोर बस पहर बीताने,
यादों में नैन भीगा जाता है।
वाह री किस्मत तेरे फैसले,
लाख मंजूर मुझे,
पर तुझसे क्या जीत पाऊँगा?
रातों को जो सोचा,
तुझसे हार कर भी जी जाऊँगा?
वाह री किस्मत तेरे फैसले,
इनसे लड़ जाऊँ,
मुझ में इतनी ताकत नहीं।
कुछ तो रहम कर,
मुझे अपने ही गम से राहत नहीं।
वाह री किस्मत तेरे फैसले,
राहत भी क्या तुझसे,
मुझे मंजूर होगी?
गम से मैं खुद लड़ जाऊँ,
तेरी ये रज़ा भी तो बेकसूर होगी।
वाह री किस्मत तेरे फैसले,
चल इनसे जीतने की
क्या आजमाइश करूँ।
बस साथ दे तो हर मुश्किल में,
इतनी सी ख्वाइश करूँ।