पेपर हैं तो पढ़ाई का है जोर
यहाँ वहाँ बस पढ़ने का है शोर
कितना पढूँ,क्या-क्या पढूँ
बना रखे हैं फार्मूला,मैं क्या गढूं?
बस नंबर खींचने का है जोर
यहाँ वहाँ बस पढ़ने का है शोर
किताबों का लिखा कुछ पल्ले पड़ता नहीं
पूछो तो पता चलता है लिखा होगा कहीं
बस रट्टा मारने का है जोर
यहाँ वहाँ बस पढ़ने का है शोर
रात-दिन है बस पढ़ना पड़ता
अक्ल के हिस्से तो कुछ न पड़ता
बस रात-रात उठने का है जोर
यहाँ वहाँ बस पढ़ने का है शोर

No comments:
Post a Comment