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Sunday, April 21, 2019

राजनीति २०१९



कुछ नहीं बदला,
अब तक इन सालों में,
जहाँ चली थी राजनीति,
अभी भी है उन्हीं हालों में।

था कुछ यूँही वक्त कटा
फिर मन्दिर तक है बवालों में,
अभी तो था पूजा नारी को,
अभी फिर है सवालों में। 

सरकारें देती कुछ वादे
जनता जीती उन्हें ख्यालों में,
मतदान तक जो देव होते
रह जाते फिर मलालों में।

२०१९ का जाम महकता
फिर वादों के उन प्यालों में,
नेता दिखता फिर एक रोज
फिर खड़ा उन हालों में।

Sunday, April 07, 2019

आजकल



राजनीति का हाल देखा,
विकास के नाम पे होता बवाल देखा,
सुबह-सुबह उठ के न्यूज़ चैनल जो खोला
पूरे दिन का अपने चेहरे पे मलाल देखा।

बस इतना ही देखा,
कि कैसे चंद महीनों में वक्त बदल गया।
५ साल कहो या ६० साल का रोना,
चुनाव देख हर नेता मचल गया।

बस इतना ही देख पाया कि
सो कर मिली शांति न चली जाए।
हो लाख वादों या जुमलों की बातें,
मतदाता की छवि न छली जाए।

कोई चौकीदार कहता है
कोई चौकीदार की बातें कहता है

बस इतना ही सुन पाया कि
कुछ बातें तो पार्टियों से इतर चली जाए।
जनसभाओं और भाषणों से निकल
कुछ बातें देशहित में भी कही जाए।