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Tuesday, November 20, 2018

एक वादा....

ये जो लम्हें होंगें ना,
दरमियाँ अपने.....
इन्हें बड़ी पाक नियत से निभाना है।
ये जो रिश्ता होगा ना,
दरमियाँ अपने......
इसे बड़ी जिम्मेदारी से सजाना है।

आएँगे कई लम्हें मुसीबत के,
उन्हें साथ-साथ ही हराना है।
जो आएँ पल खुशियों के,
उन्हें साथ-साथ ही बढ़ाना है।

ज़िन्दगी की भागदौड़ में,
ढूंढना फुरसत का बहाना है।
जो न दे सके वक्त भी एक-दूसरे को,
तो वक्त से लम्हों को चुराना है।

ये जो रिश्ता होगा ना,
दरमियाँ अपने......
इसे हर कसौटी से जीताना है।
ये जो लम्हें होंगे ना,
दरमियाँ अपने......
इन्हें बड़ी खूबसूरती से बीताना है।

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