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Monday, February 01, 2021

जय जवान जय किसान?

 


अपनी मांग रख रहे थे 

या

हिंसा कर कई मांग उजाड़ रहे थे 


किसान तो नहीं हो सकते साहब

क्या कहोगे उनको

जो लाल किले की प्राचीर से तिरंगा उखाड़ रहे थे!


बात ट्रैक्टर मार्च की हुई थी

या

उसकी जो ये हिंसा का प्रचार कर रहे थे


किसान तो नहीं हो सकते साहब

क्या कहोगे उनको

जो देश के दिल की हालत बिगाड़ रहे थे!


बात बेशक कृषि कानूनों की थी

पर ये क्या जो ये पूरा दिन कर रहे थे

किसान तो बस कंधा हैं शायद

क्या दूजी कोई साजिश मुमकिन कर रहे थे!





( शायद मैं ग़लत हूं अपनी राय को लेकर, शायद मैं ग़लत हूं इन हवाओं को लेकर जो कल दिन से हर जगह महसूस हो रही है, शायद मैं ग़लत हूं किसानों पर कही गई मेरी किसी भी राय को लेकर........

लेकिन मैं ग़लत नहीं जो कल लाल किले और देश की राजधानी में हुआ उस पर अपने विचार रख कर। कल जो हुआ उसे ग़लत कहने में कोई 'शायद' नहीं है।


जिस तरह किसानों का मकसद सिर्फ एक शांतिप्रिय मार्च निकालना था उसी तरह मेरा मकसद भी सिर्फ शांतिप्रिय तरीके से अपने विचार रखना है। किसी भी तरह से किसी के विचारों को आहत करना मेरा मकसद नहीं। )